You don't have javascript enabled. Please Enabled javascript for better performance.

CHILD DEVELOPMENT AND CARE IN ARUNACHAL PRADESH

Start Date: 18-10-2022
End Date: 31-03-2023

Children are the future of the nation. Hence, it is imperative to protect and improve their ...

See details Hide details

Children are the future of the nation. Hence, it is imperative to protect and improve their
health. If access to healthcare and quality living is ensured, casualties related to children
could be massively mitigated.
Under the dynamic and visionary leadership of Honourable Chief Minister of Arunachal
Pradesh, Shri Pema Khandu, the Government of Arunachal Pradesh has come up with
several ground-breaking measures including grants for the treatment of special children at
the Child Care Institute and Juvenile-cum-Special Home in Pasighat, East Siang
district.
CHILD DEVELOPMENT INITIATIVES IN THE STATE
The state government has been bolstering measures for child health, infant health, and
adolescent health to ensure a healthy upbringing of children through the PM Cares for
Children Scheme, a central government flagship programme, which is being implemented
in the state for the rehabilitation of Covid Orphaned Children.
Additional Child Protection Services Schemes in Arunachal:
-Juvenile Justice Board & Child Welfare Committee constituted in all 25 districts and 1 in
Capital Complex, Itanagar
-One Juvenile Observation cum Special Home at Pasighat, East Siang district
-Arunachal Pradesh Juvenile Justice Care & Protection of Children Rules, 2020 notified
-Arunachal Pradesh Guidelines for After-Care Programme 2020 notified
-Arunachal Pradesh guidelines for sponsorship of children 2021 notified
-12 registered Child Care Institutions functioning in the State with 177 children beneficiaries
In the above context, inviting citizens of Arunachal to provide feedback on the state
government's initiatives, as well as valuable suggestions on how can we improve and
enhance the quality of life for children.

All Comments
Reset
235 Record(s) Found
1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

बच्चे के लिए माता पिता की क्या जिम्मेदारी है?
बच्चों के प्रति माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनकी परवरिश, शिक्षा, और संस्कार देना चाहिए। बालमनोविज्ञानियों का परामर्श है कि बच्चों को बड़े होकर जो कुछ बनना है प्रारंभिक पांच बर्ष की आयु में ही उसकी नींव पड़ जाती है, अतः इसी आयु उनके स्वास्थ्य और खान-पान के संबंध में सजगता से ध्यान रखना चाहिए।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

बच्चे को लेट कर दूध कब तक नहीं पिलाना चाहिए?
छह माह तक के बच्चों को ज्यादातर महिलाएं लेटकर दूध पिलाती है। इससे बच्चों के कान के पर्दे को नुकसान हो सकता है। इलाज में लापरवाही से उसकी सुनने की शक्ति कम हो सकती है। छह माह तक के बच्चों को ज्यादातर महिलाएं लेटकर दूध पिलाती है।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

दूध पिलाने वाली माँ को क्या नहीं खाना चाहिए?
शिशु को दूध पिलाने वाली मांओं को जंक और मसालेदार चीजें नहीं खानी चाहिए। ये चीजें दूध के जरिए शिशु के शरीर में पहुंचकर, उसकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आप ज्‍यादा मीठी चीजें और गैस पैदा करने वाली चीजें जैसे कि गोभी भी न खाएं। कच्‍ची चीजें जैसे कि अंडा और सीफूड न खाएं।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

मूंगफली बच्चों के लिए अच्छी है?
मूंगफली और पीनट बटर बढ़ते बच्चों के लिए किफायती और पौष्टिक विकल्प हैं , जिसका स्वाद उन्हें पसंद है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के नए दिशानिर्देश मूंगफली एलर्जी को रोकने के लिए शिशुओं को 4-6 महीने (जोखिम के आधार पर) से पहले मूंगफली प्रोटीन देने की सलाह देते हैं।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

Pediasure 7+ के क्या लाभ हैं?
Pediasure 7+ स्वस्थ आहार के साथ पोषण की आवश्यकता को पूरा करने में मदद करता है।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

बच्चे को रात में कितनी बार दूध पिलाना चाहिए?
डॉक्टर की सलाह हाे सकती है कि जब तक शिशु अपने जन्म के समय के वजन के बराबर नहीं हो जाए, आप उसे दिन और रात में हर दो-तीन घंटे में दूध पिलाएं।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

बच्चे को कितने घंटे में दूध पिलाना चाहिए?
4 से 6 महीने के बच्चे को 4 से 5 घंटे दूध पिलाना चाहिए। 6 महीने से ज्यादा के बच्चे को दिन में 4 से 5 घंटे दूध पिलाना चाहिए। (ध्यान रहें कि पूरे दिन में घंटों की बात हो रही है, एक साथ 5 घंटे तक दूध नहीं पिलाना है)।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

माता-पिता को अपने बच्चे पर चिल्लाना क्यों नहीं चाहिए?
द जर्नल ऑफ चाइल्ड डेवलपमेंट में 2014 के एक अध्ययन से पता चला है कि चिल्लाना बच्चों में शारीरिक दंड के समान परिणाम उत्पन्न करता है:- व्यवहार संबंधी समस्याओं में वृद्धि के साथ चिंता, तनाव और अवसाद के स्तर में वृद्धि ।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

बच्चे को जन्म घुट्टी कब से देना चाहिए?
विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की मानें तो नवजात शिशु को छह महीने का होने तक मां के दूध या फॉर्मूला मिल्‍क के अलावा और कुछ नहीं देना चाहिए। डॉक्‍टर भी नवजात शिशु को घुट्टी पिलाने से मना करते हैं।

1582180

BrahmDevYadav 1 week 6 days ago

बच्चे का सबसे पहला शिक्षक कौन होता है?
छोटे बच्चे अपने माता-पिता और परिवार पर निर्भर होते हैं, और यह वह परिवार होता है जो युवा बच्चे का पहला शिक्षक होता है। वास्तव में, माँ को पहली शिक्षिका माना जाता है। इस प्रकार, माता-पिता युवा बच्चों की सोच प्रक्रिया, भावनाओं, दृष्टिकोण और विचारों के विकास में एक स्थायी प्रभाव रखते हैं।