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Curbing Drugs Menace in the State for a Better Environment for the Youth

Start Date: 01-12-2022
End Date: 30-04-2023

Hardcore drugs, tobacco and alcohol are chief substances consisting of underlying toxic ingredients, that may lead to irreversible health damage or untimely demise of an ...

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Curbing Drugs Menace in the State for a Better Environment for the Youth

Hardcore drugs, tobacco and alcohol are chief substances consisting of underlying toxic ingredients, that may lead to irreversible health damage or untimely demise of an individual. And the bitter ground reality is that more than half of the substance abusers are youths. And more often than not, they start very young.

Children may learn what they perceive from their environment, be it under the boundary of their home and surveillance, the premises of the educational institution and supervision or simply around peer groups outside in the recreational zones. We can never be too careful when it comes to unanticipated addiction to lethal substances. Young minds tend to be naive hence, they get deeper into such habits, even when they want to get out of the addiction. And it is inevitable that once an individual falls into the trap of addiction, it is relatively harsh to come back to sobriety and fit into the norms of society.

Extreme addiction to illicit substances also has a higher likelihood in carving the path to criminal and unlawful directions. Instances of addiction and withdrawal have led to sinful crimes such as murder, smuggling, robbery and kidnapping amongst others. However, the consequences of substance addiction aren't limited to criminal activities alone. It can drastically affect one’s mental and physical health to the point of no return; in extreme cases, it may also lead to death.

Keeping the unfavourable aspects of toxic substance consumption as context, MyGov Arunachal invites you to share your valuable suggestions on measures to tackle drug menace-related issues in the state.

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458 Record(s) Found

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

ड्रग एब्यूज का उपचार।
आम तौर पर, उपचार का कोर्स मेडिकल असिस्टेंस और काउन्सलिंग या अन्य बिहेवियरल थेरेपीज का संयोजन है। रोगी की प्रगति की जांच करने और आवश्यकतानुसार संशोधित करने के लिए उपचार की लगातार समीक्षा की जानी चाहिए।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

नशे की लत से छुटकारा कैसे पाएं?
किसी भी प्रकार के नशे को छोड़ने के लिए सबसे पहले उसकी मात्रा कम करें। शराब का पैग छोटा कर दें या सिगरेट पीने से पहले उसे तोड़कर छोटी कर दें। अपने पास लाइटर, माचिस, गुटखे की पुड़िया, तंबाकू रखना छोड़ दें। डायरी बनाएं और उसमें लिखें कि नशा कब और कितनी मात्रा में, किसके साथ लेते हैं और उसे बार-बार पढ़ें।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

नशे की रोकथाम क्यों महत्वपूर्ण है?
वर्तमान में नशापान करने की प्रवृत्ति समाज में तेजी से बढ़ती जा रही है, जो चिंता का विषय है। इसकी रोकथाम के लिए सभी में जागरूकता लाना अत्यंत आवश्यक है। यह दिवस एक तरफ लोगों में चेतना फैलाता है, तो दूसरी तरफ नशे के आदी लोगों के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य करता है।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

नशा करने से सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर क्या असर पड़ता है?
नशे पर निर्भर व्यक्ति बिना किसी के सहयोग से उसे छोड़ नहीं पाता। नशे की लत से शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक क्षति होती है। आर्थिक क्षति की तो पूर्ति की जा सकती है, लेकिन शारीरिक व मानसिक क्षति की पूर्ति नहीं हो सकती है।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

नशा मुक्ति क्यों जरूरी है?
नशा एक अभिशाप है, एक ऐसी बुराई जिससे इंसान का अनमोल जीवन मौत के आगोश में चला जाता है एवं उसका परिवार बिखर जाता है। व्यक्ति के नशे के आदि होने के कई कारण हो सकते हैं। यह कारण व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक हो सकते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य कारण अधोलिखित हैं।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

धूम्रपान और शराब पीने का लोगों और समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?
विश्व भर में, तंबाकू के बढ़ते उपयोग और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव चिंता का कारण बन गये हैं। गैर-संचारी रोग (एनसीडी) जैसे कि इस्कीमिक हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, पुरानी सांस की बीमारियां इत्यादि विश्व स्तर पर होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण हैं, जो कि तंबाकू के सेवन के साथ जुड़ी हैं।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

समस्या का मूल कारण क्या है?
मूल समस्या यह है कि व्यक्ति अपने आपको नहीं देख पा रहा है। उसके पीछे ये पांच कारण या समस्याएं काम कर रही है- पहली मिथ्या दृष्टिकोण, दूसरी असंयम, तीसरी प्रमाद, चौथी कषाय, पांचवीं चंचलता। जैन दर्शन ने बताया कि मूल समस्याएं ये पांच हैं। यही वास्तव में दु:ख है।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

जीवन की सबसे बडी समस्या क्या है?
जीवन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि अपने आप को हमेशा सही समझना। कभी आप गलत भी हो सकते हो।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

जीवन में समस्याओं का समाधान कैसे करें?
क्या हम समाधान चाहते हैं? तो सच मानो, समस्या ही समाधान देगी, समस्या पर ठीक से चिंतन करो, चिंता से मत भर जाओ। थोड़े से खुले मन, थोड़े से धैर्य, थोड़े से समर्पण, थोड़ा सा त्याग करने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। केवल दैववादी बनकर बैठे रहोगे तो वह भी उपाय नहीं है।

BrahmDevYadav 1 week 4 days ago

समाज सुधार की आवश्यकता क्यों है?
चूंकि बुराइयों की जड़ें बहुत गहरी हैं, इसलिए उन्हें हटाना आसान नहीं है। इसके लिए उन व्यक्तियों की मानसिकता को बदलने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है जो बुराइयों को सही ठहराने का प्रयास करते हैं। इसलिए सामाजिक सुधार के लिए आम तौर पर सामूहिक रूप से आंदोलन चलाए जाते हैं।